HAPPY GURU PURNIMA

गुरु पूर्णिमा: ज्ञान, भक्ति और श्रद्धा का पर्व

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पावन एवं प्रेरणादायक पर्व है, जो गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह वही दिन है जब महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का विभाजन कर मानव समाज को ज्ञान का अमूल्य उपहार दिया। अतः इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।


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गुरु का महत्व

“गुरु” का अर्थ है – गु यानी अंधकार और रु यानी उसका नाश करने वाला। गुरु वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञानरूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञानरूपी प्रकाश का संचार करते हैं। एक सच्चा गुरु न केवल हमें शास्त्रों और विषयों का ज्ञान देता है, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर हमें सही दिशा दिखाता है, हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करता है और हमारी आत्मा को जाग्रत करता है।

शास्त्रों में भी कहा गया है:

> “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥”



इस श्लोक में गुरु को ब्रह्मा (सृजनकर्ता), विष्णु (पालक) और महेश (संहारक) के समान माना गया है। गुरु साक्षात् परम ब्रह्म हैं – अतः उन्हें नमन करना ही हमारा कर्तव्य है।


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गुरु पूर्णिमा का उद्देश्य

यह पर्व न केवल आध्यात्मिक गुरुओं को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, बल्कि यह हमें यह भी स्मरण कराता है कि जीवन में किसी न किसी रूप में गुरु की उपस्थिति आवश्यक है – चाहे वह माता-पिता हों, शिक्षक हों, आध्यात्मिक मार्गदर्शक हों या कोई जीवन में प्रेरणा देने वाली आत्मा।


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गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं

🌺 गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपने गुरुजनों को सादर नमन।
🌟 आपके जीवन में गुरु का प्रकाश सदा बना रहे और आपके मार्ग को आलोकित करता रहे।
🙏 गुरु चरणों में श्रद्धा पूर्वक समर्पित हार्दिक शुभकामनाएं।


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निष्कर्ष

गुरु पूर्णिमा हमें आत्ममंथन का अवसर देती है। यह दिन हमें यह सोचने को प्रेरित करता है कि हमारे जीवन में गुरु का स्थान क्या है, और हम किस मार्ग पर चल रहे हैं। जो व्यक्ति गुरु को समर्पित होकर चलता है, वह जीवन में कभी भी भटकता नहीं।

गुरु के बिना जीवन अधूरा है।
गुरु के चरणों में ही मोक्ष का मार्ग है

 *TRAINER ANIL MAURYA*
       *8853733151*

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